भारतीय संविधान सभी भारतीयों के लिए एक संविधान होने के साथ-साथ भारत के संवैधानिक ढांचे के विभिन्न पहलुओं को संशोधित एवं समायोजित करने का वास्तविक प्रयास था। संविधान सभा इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए बनाई गई थी।
संविधान सभा की मुख्य भूमिका संविधान के लिए एक ड्राफ्ट तैयार करना था जो बाद में फाइनल संविधान के रूप में स्वीकृत होता था। संविधान सभा के सदस्यों को संविधान के मुख्य विषयों पर विचार करने और उन्हें विस्तृत रूप से विस्तारित करने का भी काम था।
संविधान सभा में सदस्यों को इस तरह के संवैधानिक विषयों पर विचार करना था जैसे - संवैधानिक संरचना, अधिकार एवं कर्तव्य, नागरिक के मूलाधिकार, संवैधानिक संस्थाओं और उनके कार्यों, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच संबंध एवं भारत के संवैधानिक विकास के लिए नीतियों को समायोजित करना।