उत्तर :–
प्रश्न यह है कि क्या राजनीतिक सिद्धांत मर चुका है। यह एक विवादित मुद्दा है और इसका कोई सरल उत्तर नहीं है। कुछ लोगों का मत है कि राजनीतिक सिद्धांत वास्तव में मर चुका है, जबकि दूसरों का मानना है कि यह अभी भी जीवित और प्रासंगिक है।
इस सवाल को समझने का एक तरीका यह है कि आप राजनीतिक सिद्धांत के ऐतिहासिक विकास को देखें। राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन बहुत समय से चल रहा है और यह समय के साथ सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों का उत्तर देने के लिए विकसित हुआ है। लोगों ने प्राचीन ग्रीक से शुरू होकर आधुनिक युग तक शासन, न्याय, अधिकार और सत्ता की प्रकृति को समझने की कोशिश की है।
हालांकि, हाल के दशकों में कुछ विद्वानों ने दावा किया है कि राजनीतिक सिद्धांत अपनी महत्वपूर्णता खो दिया है और वास्तविक दुनिया से अलग हो गया है। उनका तर्क है कि राजनीतिक सिद्धांत बहुत थियोरेटिकल और संगठित हो गया है और इसे समकालीन राजनीतिक मुद्दों और चुनौतियों से जोड़ने में असफलता हो रही है ।
कुछ विद्वानों के मुताबिक, राजनीतिक सिद्धांत अभी भी बहुत महत्वपूर्ण और उपयोगी है। यह एक जीवंत और गतिशील क्षेत्र है, जहाँ हर समय नए सिद्धांत और दृष्टिकोण उभरते रहते हैं। इससे हम वास्तविक दुनिया की राजनीति के साथ जुड़े रहते हैं और नीति निर्माताओं और कार्यकर्ताओं को मूल्यवान अंतर्दृष्टि और मार्गदर्शन प्रदान करता है।
निष्कर्ष:–
यह सवाल कि क्या राजनीतिक सिद्धांत मर चुका है, विवादित है। लेकिन यह स्पष्ट है कि राजनीतिक सिद्धांतों का अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है। इसका मर या जीवित होना उस व्यक्ति की परिभाषा और समझ पर निर्भर करता है जो इस क्षेत्र को अध्ययन करता है, और यह समकालीन राजनीति में क्या माना जाता है।